बस्ती: भ्रष्टाचार की ‘कवच’ बनी अफसरों की साठगांठ, कैबिनेट मंत्री के आदेशों की उड़ी धज्जियां
भ्रष्टाचार पर भारी 'मैडम' की सेटिंग! कैबिनेट मंत्री के दो-दो पत्रों को अपर निदेशक ने दिखाया ठेंगा बस्ती मंडल में 'जीरो टॉलरेंस' की उड़ी धज्जियां: जांच के नाम पर 8 महीने से चल रहा है लीपापोती का 'महाखेल'
अजीत मिश्रा (खोजी)
वरिष्ठ सहायिका कनिज फातिमा पर लगे गंभीर आरोपों को अपर निदेशक ने किया रफा-दफा; जांच के नाम पर 8 माह से चल रहा लीपापोती का खेल
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती (उत्तर प्रदेश)
- बस्ती स्वास्थ्य विभाग में मंत्री के आदेश ‘बेअसर’, भ्रष्टाचार की ‘महारानी’ को बचाने में जुटे अफसर!
- 8 महीने से फाइल दबाए बैठे एडी हेल्थ; कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर के दो-दो पत्र भी रद्दी के भाव!
- योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ को बस्ती में लगा पलीता: अफसरों ने कैबिनेट मंत्री को दिखाया ठेंगा!
- कनिज फातिमा के भ्रष्टाचार पर एडी हेल्थ की ‘कागजी लीपापोती’ बेनकाब, फोन पर भी नहीं मिला जवाब।
- बस्ती का ‘कमीशन कांड’: बिना 20% नहीं हिलता पत्ता, आउटसोर्सिंग भर्ती में भी बड़े खेल का आरोप!
- सीएमओ दफ्तर में अंगद की तरह जमी वरिष्ठ सहायिका पर मेहरबान अधिकारी; जांच के नाम पर रची गई फर्जी रिपोर्ट।
- अफसरों की ‘सेटिंग’ या भ्रष्टाचार की ‘बैटिंग’? मंत्री के आदेश के बाद भी जांच में ‘बड़ा खेल’!
बस्ती। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक तरफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ बस्ती मंडल के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार के सिंडिकेट ने सरकार की साख को दांव पर लगा दिया है। ताजा मामला मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायिका कनिज फातिमा से जुड़ा है, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद भी विभाग उन्हें बचाने में नंगा नाच कर रहा है। हद तो तब हो गई जब प्रदेश के कैबिनेट मंत्री के दो-दो पत्रों के बाद भी जिले के आला अधिकारियों ने जांच के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की।उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही भ्रष्टाचार पर ‘बुलडोजर’ चलाने का दावा करती हो, लेकिन बस्ती जिले के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि यहाँ कैबिनेट मंत्री के आदेश भी बौने साबित हो रहे हैं। सीएमओ कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायिका कनिज फातिमा के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों पर निष्पक्ष जांच होने के बजाय, उन्हें बचाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने पूरी ताकत झोंक दी है।
कैबिनेट मंत्री के पत्र को दिखाया ठेंगा
श्रम एवं सेवायोजन विभाग के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने कनिज फातिमा के खिलाफ मिली भ्रष्टाचार की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी को दो बार पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच के कड़े निर्देश दिए थे। शासन स्तर से दबाव के बाद पूर्व जिलाधिकारी रवीश गुप्ता ने मामले की जांच अपर निदेशक (AD) चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, बस्ती मंडल को सौंपी थी। लेकिन आरोप है कि जांच अधिकारी ने निष्पक्षता की कसौटी पर उतरने के बजाय आरोपी सहायिका को ‘क्लीन चिट’ देने के लिए मनगढ़ंत और कूटरचित रिपोर्ट तैयार कर ली।प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर (श्रम एवं सेवायोजन विभाग) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दो बार पत्र जारी कर निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए थे। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि जिस तंत्र को न्याय करना था, वही ‘कवच’ बनकर खड़ा हो गया है। जब कैबिनेट मंत्री के पत्र पर यह हाल है, तो आम जनता की शिकायतों का क्या हश्र होता होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
अपर निदेशक स्वास्थ्य पर ‘लीपापोती’ के गंभीर आरोप
पूर्व जिलाधिकारी रवीश गुप्ता ने इस मामले की जांच अपर निदेशक स्वास्थ्य (बस्ती मंडल), डॉ. अश्विनी कुमार को सौंपी थी। आरोप है कि डॉ. कुमार ने 8 महीने बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई करने के बजाय, एक ‘मनगढ़ंत और कूटरचित’ रिपोर्ट तैयार कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया है। जब इस संबंध में उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: एक नजर में
- अंगद की तरह जमाया पैर: कनिज फातिमा वर्षों से एक ही पटल पर जमी हुई हैं। आरोप है कि बिना 20% कमीशन लिए यहाँ पत्ता भी नहीं हिलता।
- आउटसोर्सिंग घोटाला: वर्ष 2024 में ‘अवनी परिधि’ कंपनी के माध्यम से हुई भर्तियों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और अपनों को उपकृत करने का आरोप है।
- पटल परिवर्तन की मांग: भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए उनके पटल (चिकित्सा पूर्ति भुगतान एवं आउटसोर्सिंग) को तत्काल बदलने की मांग की जा रही है, लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत के कारण फाइलें दबी हुई हैं।
भ्रष्टाचार का ‘रेट कार्ड’ और अंगद की तरह जमा पैर
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कनिज फातिमा सीएमओ कार्यालय में वर्षों से एक ही पटल पर ‘अंगद’ की तरह पैर जमाए बैठी हैं। सूत्रों की मानें तो विभाग में भ्रष्टाचार इस कदर हावी है कि किसी भी कार्य के लिए 20 प्रतिशत का कमीशन तय कर दिया गया है। बिना सुविधा शुल्क और दसियों बार कार्यालय के चक्कर लगाए बिना आम आदमी का कोई काम होना यहाँ असंभव सा है।
आउटसोर्सिंग भर्ती में बड़े खेल का खुलासा
शिकायती पत्र में सबसे चौंकाने वाला आरोप वर्ष 2024 में अवनी परिधि कंपनी द्वारा की गई आउटसोर्सिंग नियुक्तियों को लेकर है। आरोप है कि कनिज फातिमा ने जिम्मेदार अधिकारियों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर फर्जी नियुक्तियां कराईं और मोटी रकम की उगाही की। इस घोटाले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। विभाग की छवि धूमिल होने के बावजूद उच्च अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं।
एडी हेल्थ की भूमिका संदिग्ध, सवालों के घेरे में जांच
पूरे प्रकरण में सबसे संदिग्ध भूमिका अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. अश्विनी कुमार की बताई जा रही है। 08 माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी निष्पक्ष जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। जब इस मुद्दे पर मीडिया ने फोन के माध्यम से उनसे जानकारी लेनी चाही, तो उन्होंने कोई भी संतोषजनक उत्तर देने के बजाय टालमटोल कर दिया। चर्चा है कि डॉ. कुमार ने बिना किसी धरातलीय जांच के अपनी कुर्सी का दुरुपयोग करते हुए फर्जी रिपोर्ट प्रेषित कर दी है।
आम जनता का उठा भरोसा
जब जिले में कैबिनेट मंत्री के आदेश की फाइलें धूल फांक रही हैं, तो सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम जनता की शिकायतों का क्या हाल होता होगा। बस्ती की जनता अब सवाल पूछ रही है कि आखिर कनिज फातिमा के पास ऐसा कौन सा ‘पावर’ है जिससे जिले के आला अधिकारी उनके सामने नतमस्तक हैं?
मुख्य बिंदु जिन पर कार्रवाई की मांग:
- कनिज फातिमा को तत्काल प्रभाव से वर्तमान पटल (चिकित्सा पूर्ति एवं आउटसोर्सिंग) से हटाया जाए।
- एडी हेल्थ द्वारा दी गई रिपोर्ट की दोबारा उच्च स्तरीय जांच हो।
- भ्रष्टाचार के साक्ष्यों के आधार पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
क्या बस्ती का स्वास्थ्य विभाग कैबिनेट मंत्री और सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति से ऊपर है? आखिर कनिज फातिमा पर मेहरबानी दिखाने वाले इन उच्च अधिकारियों का असली स्वार्थ क्या है?
यह रिपोर्ट शासन-प्रशासन की नींद उड़ाने के लिए काफी है। क्या आपको लगता है कि इस रिपोर्ट के बाद स्थानीय प्रशासन पर कोई दबाव बनेगा, या खेल ऐसे ही चलता रहेगा?अब देखना यह है कि क्या शासन इस ‘लीपापोती’ करने वाले सिंडिकेट पर कोई कार्रवाई करता है या फिर भ्रष्टाचार की यह गंगा ऐसे ही बहती रहेगी।








